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बुधवार, 18 सितंबर 2013

ग़ज़ल ( सेक्युलर कम्युनल )


 
गज़ल ( सेक्युलर कम्युनल )

 
जब से बेटे जबान हो गए 
मुश्किल में क्यों प्राण हो गए 

किस्से सुन सुन के संतों के 
भगवन भी हैरान हो गए 

आ धमके कुछ ख़ास बिदेशी 
घर बाले मेहमान हो गए 

सेक्युलर कम्युनल के चक्कर में 
गाँव गली शमसान हो गए 

कैसा दौर चला है अब ये 
सदन कुश्ती के मैदान हो गए 

बिन माँगें सब राय  दे दिए 
कितनों के अहसान हो गए



प्रस्तुति:

मदन मोहन सक्सेना 



5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही आनंद-दायक-
    आभार भाई-

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  2. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .. आपकी इस रचना के लिंक की प्रविष्टी सोमवार (23.09.2013) को ब्लॉग प्रसारण पर की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें .

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  3. बहुत ही सटीक और दिल को छू लेने वाली गजल ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सेक्युलर कम्युनल के चक्कर में
    गाँव गली शमसान हो गए

    Bahut Bahut Umda

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