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मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

ग़ज़ल (हर इन्सान की दुनिया में इक जैसी कहानी है )






हर  लम्हा तन्हाई का एहसास मुझको  होता  है
जबकि  दोस्तों के बीच अपनी गुज़री जिंदगानी है

क्यों अपने जिस्म में केवल ,रंगत  खून की दिखती
औरों का लहू बहता , तो सबके लिए पानी है

खुद को भूल जाने की ग़लती सबने कर दी है
हर इन्सान की दुनिया में इक जैसी कहानी है

दौलत के नशे में जो अब दिन को रात कहतें हैं
हर गलती की  कीमत भी, यहीं उनको चुकानी है

मदन ,वक़्त की रफ़्तार का कुछ भी भरोसा  है नहीं
किसको जीत मिल जाये, किसको हार  पानी है

सल्तनत ख्वाबों की मिल जाये तो अपने लिए बेहतर है
दौलत आज है  तो क्या , आखिर कल तो जानी है

ग़ज़ल (हर इन्सान की दुनिया में इक जैसी कहानी है )
मदन मोहन सक्सेना


मंगलवार, 5 अप्रैल 2016

ग़ज़ल (इश्क क्या है ,आज इसकी लग गयी हमको खबर )




हर सुबह  रंगीन   अपनी  शाम  हर  मदहोश है
वक़्त की रंगीनियों का चल रहा है सिलसिला

चार पल की जिंदगी में ,मिल गयी सदियों की दौलत
जब मिल गयी नजरें हमारी ,दिल से दिल अपना मिला

नाज अपनी जिंदगी पर ,क्यों न हो हमको भला
कई मुद्द्दतों के बाद फिर  अरमानों का पत्ता हिला

इश्क क्या है ,आज इसकी लग गयी हमको खबर
रफ्ता रफ्ता ढह गया, तन्हाई का अपना किला

वक़्त भी कुछ इस तरह से आज अपने साथ है
चाँद सूरज फूल में बस यार का चेहरा मिला

दर्द मिलने पर शिकायत ,क्यों भला करते मदन
 दर्द को देखा जो   दिल में मुस्कराते ही मिला


ग़ज़ल (इश्क क्या है ,आज इसकी लग गयी हमको खबर )

मदन मोहन सक्सेना